नवरात्रि शुरू होते ही घर में पूजा की तैयारी, मंदिरों में रौनक और व्रत रखने वालों की संख्या बढ़ जाती है। और जैसा की आप लोग जानते है कि इस साल शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है। लेकिन व्रत के दूसरे या तीसरे दिन कुछ लोगों को अचानक थकान, सिरदर्द, चक्कर या शरीर में सुस्ती महसूस होने लगती है। तो ऐसे में सवाल उठता है कि Navratri vrat mein kamzori kyun hoti hai?
अक्सर इसकी वजह व्रत नहीं, बल्कि व्रत के दौरान पानी कम पीना, बहुत देर तक खाली पेट रहना, तला-भुना फलाहार खाना या नींद पूरी न होना होती है।
और क्या आप जानते हैं?
एक स्टडी में उत्तर भारत के टाइप 2 डायबिटीज़ वाले 300 लोगों की धार्मिक व्रत संबंधी आदतों को देखा गया था, जिसमें नवरात्रि सबसे अधिक रखे जाने वाले हिंदू व्रतों में शामिल थी। touchREVIEWS in Endocrinology में छपी इस स्टडी में नवरात्रि व्रत की हिस्सेदारी करीब 34.5% बताई गई।
इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि व्रत रखना है या नहीं। सवाल यह भी है कि नवरात्रि व्रत में कमजोरी क्यों होती है और व्रत के दौरान शरीर को सहज कैसे रखा जाए। और यहीं आचार्य मनीष जी के बताए व्रत से जुड़े कुछ आसान उपाय काम आ सकते हैं।
नवरात्रि व्रत में कमजोरी क्यों होती है?
व्रत रखने के बाद हर व्यक्ति को कमजोरी हो, ऐसा जरूरी नहीं है। परेशानी तब बढ़ सकती है जब रोज़ की खाने-पीने और सोने की आदत अचानक बहुत बदल जाए। खासकर जो लोग बिना तैयारी के कई घंटे तक कुछ नहीं खाते, उन्हें शुरुआत के दिनों में थकान अधिक महसूस हो सकती है।
इसके पीछे कुछ सामान्य वजहें होती हैं, जैसे कि:
- पानी कम पीना: पूजा, काम और बाहर आने-जाने के बीच कई लोग पानी पीना भूल जाते हैं। इससे सिरदर्द, मुंह सूखना और थकान जैसी परेशानी हो सकती है।
- बहुत लंबे समय तक खाली पेट रहना: लंबे अंतराल तक खाना न खाने पर कुछ लोगों को कमजोरी, कंपकंपी या चक्कर महसूस हो सकते हैं, खासकर जब उनका शरीर इस तरह के उपवास का आदी न हो।
- सिर्फ आलू और साबूदाना पर निर्भर रहना: फलाहार का मतलब केवल तला हुआ साबूदाना, आलू या पकौड़े खाना नहीं है। ऐसी थाली पेट तो भर सकती है, लेकिन उसमें फल, दही, मेवे और दूसरे पोषक विकल्पों की कमी रह सकती है।
- प्रोटीन वाले विकल्प कम लेना: भारतीय देसी गाय का दूध, दही, मेवे और बीज जैसे विकल्प न लेने से भोजन और कम संतुलित हो सकता है।
- नींद का बिगड़ना: नवरात्रि में देर रात तक गरबा, जागरण या पूजा और सुबह जल्दी उठने से नींद कम हो सकती है। इसका असर अगले दिन की ऊर्जा पर साफ दिखाई देता है।
- बहुत ज्यादा चाय-कॉफी: खाली पेट चाय या कॉफी कुछ लोगों में घबराहट, एसिडिटी या बेचैनी बढ़ा सकती है।
यानी कमजोरी का कारण अक्सर एक नहीं होता। खाना कम होना, पानी कम होना और नींद पूरी न होना एक साथ मिल जाएं, तो उपवास में थकान काफी ज्यादा महसूस हो सकती है।
आयुर्वेद व्रत और अग्नि को कैसे देखता है?
आयुर्वेद में व्रत को लंघन की अवधारणा से जोड़ा जाता है। आसान भाषा में समझें तो इसका संबंध शरीर को कुछ समय के लिए हल्का रखने से है। आयुर्वेद में भोजन को पचाने वाली शक्ति को अग्नि कहा गया है और भोजन की मात्रा, समय तथा व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार खान-पान रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
व्रत के दौरान हल्का और सादा भोजन लेने से कुछ लोगों को पेट हल्का महसूस हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जितना ज्यादा भूखा रहा जाए, उतना अच्छा होगा। बहुत लंबे समय तक खाना छोड़ देना हर व्यक्ति के लिए ठीक नहीं होता। खासकर अगर पहले से कमजोरी रहती है, दिनभर शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है या कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो व्रत का तरीका अलग रखना पड़ सकता है।
आयुर्वेद का जोर भी इसी संतुलन पर है कि व्रत ऐसा हो जिसमें संयम रहे, लेकिन शरीर की रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज न किया जाए।
यही बात आचार्य मनीष जी के बताए इन आसान उपायों में भी दिखाई देती है। अगर आप सोच रहे हैं कि नवरात्रि व्रत में क्या खाएं, तो सबसे पहले भोजन को सादा, संतुलित और अपनी क्षमता के अनुसार रखना जरूरी है।
आचार्य मनीष जी के बताए गए 5 आसान उपाय
नवरात्रि के दौरान खान-पान को बहुत मुश्किल बनाने की जरूरत नहीं है। कुछ छोटी आदतें अपनाकर व्रत के दिनों को ज्यादा आसान बनाया जा सकता है।
1. दिन की शुरुआत पानी से करें
सुबह उठने के बाद धीरे-धीरे एक या दो गिलास पानी पिएं। अगर आपको गुनगुना पानी पसंद है, तो इसे अपनी सुबह की दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।
इसके बाद भी पूरे दिन पानी एक साथ बहुत ज्यादा पीने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेते रहें। नारियल पानी भी एक विकल्प हो सकता है। अगर आपको सूट करता है, तो नींबू पानी में थोड़ी मात्रा में सेंधा नमक मिलाकर लिया जा सकता है।
यह बात खासतौर पर उन लोगों के लिए जरूरी है जो व्रत के दौरान सामान्य दिनों की तुलना में कम पानी पीने लगते हैं।
2. बहुत लंबा गैप न रखें
व्रत का मतलब यह नहीं है कि सुबह कुछ खाया और सीधे शाम को भोजन किया। अगर ऐसा करने पर आपको व्रत में चक्कर आना या बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होती है, तो भोजन के बीच का अंतर कम करना बेहतर हो सकता है।
हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है, लेकिन दिन में छोटे-छोटे फलाहार लेना कई लोगों के लिए ज्यादा सहज रहता है। केला, पपीता, सेब, अनार और अमरूद या फिर अन्य मौसमी फल लिए जा सकते हैं।
बीच में भुना मखाना, कुछ मेवे या दही भी लिया जा सकता है। इससे भोजन केवल मीठे फलों या स्टार्च वाले खाद्य पदार्थों तक सीमित नहीं रहता।
3. तले हुए फलाहार की जगह सादा खाना चुनें
व्रत में पकौड़े, पूरी, चिप्स और वड़े देखकर मन जरूर ललचा सकता है, लेकिन रोज़ इन्हीं पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है।
कुट्टू, सिंघाड़े या राजगिरा के आटे की रोटी, समा के चावल की खिचड़ी और घर की बनी हल्की सब्जियां अच्छे विकल्प हो सकते हैं। लौकी और कद्दू जैसी सब्जियों को कम तेल में बनाया जा सकता है।
आलू भी खा सकते हैं, लेकिन उसे हर भोजन का मुख्य हिस्सा बनाने के बजाय उबालकर या हल्के तरीके से बनाना ज्यादा आसान विकल्प है।
अगर आप सोच रहे हैं कि नवरात्रि फलाहार को रोज़ कैसे अलग रखा जाए, तो एक आसान तरीका है कि आप हर भोजन में फल, दही, मेवे या किसी दूसरे उपलब्ध फलाहारी विकल्प को जगह दें और सिर्फ तली चीजों पर निर्भर न रहें।
4. मेवे, दही और दूसरे पौष्टिक विकल्प शामिल करें
व्रत में भोजन के विकल्प सीमित हो जाते हैं, इसलिए जो चीजें खा सकते हैं, उनका संतुलित इस्तेमाल करना जरूरी है।
भीगे बादाम और अखरोट सुबह लिए जा सकते हैं। खजूर या किशमिश भी थोड़ी मात्रा में लिए जा सकते हैं। दोपहर में दही या छाछ लिया जा सकता है, अगर ये आपको आसानी से पचते हैं।
भारतीय देसी गाय का दूध भी लिया जा सकता है, लेकिन केवल तब जब दूध आपको सामान्य रूप से सूट करता हो। हर व्यक्ति के लिए एक ही भोजन सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
इस तरह की छोटी चीजें यह तय करने में मदद करती हैं कि व्रत में एनर्जी कैसे बनाए रखें और दिनभर सिर्फ चाय, आलू या साबूदाने पर निर्भर न रहना पड़े।
5. योग के साथ नींद को भी महत्व दें
नवरात्रि के दौरान कई लोग पूजा, गरबा और दूसरे कार्यक्रमों में देर रात तक व्यस्त रहते हैं। अगर इसके साथ सुबह जल्दी उठना भी जारी रहे, तो नींद पूरी होना मुश्किल हो सकता है।
व्रत के दिनों में बहुत भारी एक्सरसाइज करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार हल्की सैर, आसान योग या हल्का स्ट्रेचिंग किया जा सकता है।
अनुलोम-विलोम या भ्रामरी जैसे प्राणायाम भी रोज़ की शांत दिनचर्या का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। सबसे जरूरी बात है कि रात की नींद को लगातार नजरअंदाज न करें।
कई बार व्यक्ति खाने को कमजोरी का कारण मानता है, जबकि असली वजह लगातार कम सोना भी हो सकती है।
व्रत में ये गलतियां कमजोरी बढ़ा सकती हैं
व्रत के दौरान क्या खाना है, यह जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह देखना भी है कि क्या चीजें रोज़ की आदत न बन जाएं।
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खाली पेट चाय या कॉफी
सुबह उठते ही चाय या कॉफी पीना कई लोगों की आदत होती है। लेकिन खाली पेट कैफीन लेने से कुछ लोगों को एसिडिटी, घबराहट या बेचैनी महसूस हो सकती है। बेहतर है कि पहले कुछ हल्का खा लें और फिर चाय लें।
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पैकेट वाले व्रत स्नैक्स
व्रत के नाम पर मिलने वाले चिप्स, नमकीन और दूसरे पैकेट स्नैक्स सुविधाजनक जरूर हैं, लेकिन इनमें नमक और तेल काफी हो सकता है। घर पर भुना मखाना, मेवे या ताजे फल ज्यादा आसान और सेहतमंद विकल्प हैं।
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सिर्फ मीठे पर निर्भर रहना
साबूदाना खीर, मिठाई या बहुत मीठे पेय को ऊर्जा का मुख्य जरिया बनाना सही तरीका नहीं है। थोड़ी मात्रा में मीठा लिया जा सकता है, लेकिन पूरे दिन का फलाहार सिर्फ मीठी चीजों पर आधारित न रखें।
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धूप और भागदौड़ में सावधानी न रखना
खाली पेट लंबे समय तक धूप में रहना या बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करना कुछ लोगों में चक्कर और थकान बढ़ा सकता है। अगर आपको पहले से कमजोरी महसूस हो रही है, तो शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें।
किन लोगों को व्रत रखने से पहले विशेष सलाह लेनी चाहिए?
व्रत रखने का तरीका हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं हो सकता। खासकर कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में लंबे समय तक खाना छोड़ना या दवा के समय में बदलाव करना उचित नहीं होता।
डायबिटीज़ वाले लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। Journal of Social Health and Diabetes में प्रकाशित इस लेख में बताया गया है कि नवरात्रि का उपवास कई बार लंबे समय तक चल सकता है और डायबिटीज़ वाले व्यक्ति के लिए भोजन तथा दवा महत्वपूर्ण हो जाती है।
इसलिए अगर आप डायबिटीज़ की दवा या इंसुलिन लेते हैं, तो केवल व्रत शुरू करने के लिए अपनी दवा का समय या मात्रा खुद से न बदलें। पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
इसी तरह इन लोगों को भी व्रत से पहले व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए:
- गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं
- बार-बार चक्कर या लो ब्लड प्रेशर की समस्या वाले लोग
- किडनी या हृदय से जुड़ी समस्या वाले लोग
- थायरॉइड की दवा लेने वाले लोग
- बुज़ुर्ग
- लंबे समय से नियमित दवा लेने वाले लोग
अगर व्रत के दौरान तेज़ चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होना, बहुत तेज़ धड़कन, भ्रम, लगातार उल्टी या गंभीर कमजोरी हो, तो इसे केवल व्रत का सामान्य हिस्सा मानकर न छोड़ें। व्रत रोककर उचित चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
तो आखिर Navratri vrat mein kamzori kyun hoti hai?
अगर व्रत के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, खाने के बीच बहुत लंबा अंतर हो जाता है, भोजन केवल तली हुई चीजों तक सीमित रहता है या नींद लगातार कम होती है, तो थकान होना स्वाभाविक है। इसलिए Navratri vrat mein kamzori kyun hoti hai का जवाब केवल “व्रत रखने से” नहीं दिया जा सकता।
व्रत की थाली में थोड़ा संतुलन, दिनभर पर्याप्त तरल (पानी), सही समय पर हल्का फलाहार और पर्याप्त आराम काफी फर्क ला सकते हैं। साथ ही, अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो उसके लिए व्रत का तरीका व्यक्तिगत होना चाहिए।
निष्कर्ष
Navratri vrat mein kamzori kyun hoti hai? इसका सबसे आसान जवाब है कि व्रत के दौरान पानी, भोजन, नींद और रोज़ की दिनचर्या में अचानक बदलाव हो जाता है। लंबे समय तक खाली पेट रहना, सिर्फ तला-भुना फलाहार लेना और पर्याप्त आराम न करना थकान, सिरदर्द या चक्कर को बढ़ा सकता है।
आचार्य मनीष जी के बताए पांच आसान तरीके इसी संतुलन पर ध्यान देते हैं जो कि है, सुबह पानी लेना, बहुत लंबे समय तक खाली पेट न रहना, सादा फलाहार चुनना, मेवे और दही जैसे विकल्प शामिल करना और योग के साथ पूरी नींद लेना।
नवरात्रि श्रद्धा और अनुशासन का पर्व है। इसलिए व्रत ऐसा रखें जिसमें भक्ति के साथ अपने शरीर की जरूरतों का भी ध्यान रहे। अगर व्रत के दौरान बार-बार व्रत में चक्कर आना, अत्यधिक थकान या कोई असामान्य परेशानी हो, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय सही सलाह लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. व्रत में चक्कर आए तो तुरंत क्या करें?
पहले बैठ जाएं या सुरक्षित जगह पर आराम करें। पानी या नारियल पानी लें और जरूरत के अनुसार फल या खजूर जैसा हल्का विकल्प खाएं। चक्कर बार-बार आएं या ठीक न हों, तो डॉक्टर से सलाह लें।
2. नवरात्रि व्रत में क्या खाएं ताकि दिनभर ऊर्जा बनी रहे?
मौसमी फल, दही, मखाना, मेवे, कुट्टू या राजगिरा जैसे फलाहारी विकल्प और हल्की घर की बनी सब्जियां लिए जा सकते हैं। भोजन को बहुत लंबे अंतराल पर लेने के बजाय अपनी दिनचर्या के अनुसार छोटे हिस्सों में लें।
3. व्रत में एनर्जी कैसे बनाए रखें?
पर्याप्त पानी पिएं, बहुत लंबे समय तक खाली पेट न रहें और केवल तली हुई चीजों पर निर्भर न रहें। भोजन में फल, दही, मेवे और दूसरे उपलब्ध पौष्टिक विकल्प शामिल करें और नींद पूरी रखें।
4. क्या डायबिटीज़ वाले लोग नवरात्रि का व्रत रख सकते हैं?
यह उनकी दवा, ब्लड शुगर और पूरी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर से भोजन और दवा की योजना के बारे में बात करना जरूरी है।
5. व्रत खोलने के बाद क्या खाना चाहिए?
व्रत खोलते समय एकदम बहुत भारी या तला हुआ भोजन लेने के बजाय पानी, फल या हल्के भोजन से शुरुआत करें। इसके बाद अपनी सामान्य डाइट में धीरे-धीरे लौटें।



