दीयों की रोशनी, आंगन में रंगोली और रसोई से आती मिठाइयों की खुशबू, यही तो दिवाली की असली पहचान है। Diwali 2026 इस बार 8 नवंबर, रविवार को है। बाज़ार सज चुके हैं और घर-घर में मिठाई के डिब्बे पहुंचने लगे हैं। लेकिन मिठाई का स्वाद तभी अच्छा लगता है, जब वह शुद्ध हो। Acharya Manish ji भी यही मानते हैं कि त्योहार की खुशी सेहत के साथ ही पूरी होती है।
यह चिंता बेवजह नहीं है। FSSAI ने 2020 में दिवाली से ठीक पहले 27 राज्यों में दूध से बने उत्पादों की जांच की। कुल 2,801 सैंपल में से लगभग 40% तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। सबसे ज़्यादा खोया फेल हुआ, करीब 61%, जबकि ज़्यादातर मिठाइयाँ इसी से बनती हैं। इस ब्लॉग में जानें कि मिलावट क्यों बढ़ती है, शुद्ध मिठाई कैसे चुनें, और दिवाली पर सेहत का ख्याल कैसे रखें।
Diwali 2026: मिठाइयों के साथ सेहत का ध्यान क्यों ज़रूरी है
दिवाली सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं है। धनतेरस से भाई दूज तक, पूरे पाँच दिन घर में मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है। हर घर से मिठाई का डिब्बा आता है और हर मुलाकात पर कुछ मीठा खिलाया जाता है।
इस Festive Season में हम कुछ ही दिनों में उतनी मिठाई खा लेते हैं, जितनी आम तौर पर पूरे महीने में भी नहीं खाते। ज़्यादा चीनी अपने आप में एक समस्या है। फिर भी, इससे बड़ा खतरा मिठाई की शुद्धता का है। अगर खोया, घी या रंग ही ठीक नहीं है, तो थोड़ी-सी मिठाई भी पेट खराब कर सकती है।
क्या आप जानते हैं?
दिवाली से पहले दूध, खोया और घी की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है। इसी वजह से FSSAI हर साल त्योहारों से पहले विशेष जांच अभियान चलाता है। इस साल भी नवरात्रि और दिवाली से पहले मिठाई, खोया, घी और पनीर की जांच तेज़ करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब सवाल यह है कि त्योहारों में ही मिलावट इतनी क्यों बढ़ जाती है।
त्योहारों में मिठाइयों में मिलावट क्यों बढ़ जाती है?
त्योहार आते ही मिठाई की दुकानों पर लंबी कतारें लग जाती हैं। मांग बढ़ती है, लेकिन शुद्ध दूध की सप्लाई उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ पाती। यहीं से गड़बड़ी शुरू होती है। इसके कुछ मुख्य कारण हैं —
- मांग और सप्लाई का फर्क: एक किलो खोया बनाने में कई लीटर दूध लगता है। जब मांग अचानक बढ़ती है, तो कुछ लोग सस्ते विकल्प मिलाने लगते हैं।
- मुनाफे का दबाव: कम दाम पर ज़्यादा मिठाई बेचने के लिए घटिया सामग्री का इस्तेमाल होता है।
- जल्दबाज़ी में तैयारी: त्योहार से कई दिन पहले ही भारी मात्रा में मिठाई बना ली जाती है ऐसे में उसे सही तरीके से रखना मुश्किल हो जाता है।
- खुले में बिक्री: सड़क किनारे की कई दुकानों पर मिठाई की ट्रे बिना ढके रखी होती हैं। उस पर धूल भी जमती है और मक्खियां भी बैठती हैं।
आसान भाषा में, food adulteration का मतलब है खाने में कोई सस्ती या नुकसानदेह चीज़ मिलाना। जैसे खोये में स्टार्च मिलाना या देसी घी में वनस्पति मिलाना।
दूध की गुणवत्ता यहां सबसे अहम है, क्योंकि खोया और ज़्यादातर मिठाइयां इसी से बनती हैं। FSSAI के राष्ट्रीय दूध सुरक्षा और गुणवत्ता सर्वे में 6,432 सैंपल जांचे गए। इनमें से करीब 41% फैट और SNF जैसे गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। अच्छी बात यह रही कि डिटर्जेंट या यूरिया जैसी खतरनाक मिलावट सिर्फ 12 सैंपल में मिली। यानी बड़ी समस्या कम गुणवत्ता की थी। फिर भी, कमज़ोर दूध से बनी खोया मिठाई की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है।
अब जानते हैं कि मिठाइयों में आम तौर पर क्या मिलाया जाता है और इसका सेहत पर क्या असर होता है।
दिवाली पर सुरक्षित खानपान के लिए ये ज़रूरी टिप्स अपनाएं और किसी भी सवाल के लिए:
मिलावटी मिठाई के नुकसान: आम मिलावट और सेहत पर असर
FSSAI के 2020 के सर्वे में खोये के करीब 60.6%, पनीर के 72.7% और खोये से बनी मिठाइयों के करीब 26.9% सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। यहां “फेल” का मतलब हमेशा खतरनाक मिलावट नहीं होता। इसमें कम फैट जैसी गुणवत्ता की कमी भी शामिल है। फिर भी, ये आंकड़े बताते हैं कि सावधानी क्यों ज़रूरी है।
1. नकली या कम गुणवत्ता वाला खोया
- क्या मिलाया जाता है: खोये की मात्रा बढ़ाने के लिए कई बार स्टार्च, सस्ता मिल्क पाउडर या रिफाइंड तेल मिला दिया जाता है।
- असर: ऐसा खोया जल्दी खराब होता है। इससे पेट में भारीपन, गैस, उल्टी या फूड पॉइज़निंग हो सकती है।
2. मिलावटी घी
- क्या मिलाया जाता है: शुद्ध देसी घी महंगा होता है। इसलिए कई बार उसमें वनस्पति या दूसरी सस्ती चर्बी मिला दी जाती है।
- असर: ऐसा घी पचने में भारी होता है। लगातार खाने से पाचन कमज़ोर होता है और लंबे समय में सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।
3. बहुत चटक या गैर-अनुमत रंग
- क्या मिलाया जाता है: मिठाई को आकर्षक बनाने के लिए कई बार ज़्यादा मात्रा में रंग, या ऐसे रंग डाले जाते हैं जिनकी खाने में अनुमति नहीं है।
- असर: गैर-अनुमत रंग शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं, खासकर बच्चों के लिए।
4. नकली चांदी का वर्क
- क्या मिलाया जाता है: असली चांदी के वर्क की जगह कई बार एल्युमीनियम की पतली परत लगा दी जाती है।
- असर: एल्युमिनियम खाने के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता। इसलिए वर्क वाली मिठाई खरीदते समय सावधानी रखें।
5. बासी या गलत तरीके से रखी मिठाई
- क्या होता है: दूध से बनी मिठाइयां जल्दी खराब होती हैं। गर्म जगह पर या कई दिनों तक रखी मिठाई में बैक्टीरिया पनप सकते हैं।
- असर: इससे दस्त, उल्टी और पेट दर्द जैसी समस्याएं होती हैं।
कुल मिलाकर, मिलावटी मिठाई का असर कभी तुरंत दिखता है, तो कभी धीरे-धीरे। इसलिए सबसे अच्छा तरीका है कि खरीदते समय ही सावधानी बरती जाए। आइए जानते हैं कैसे।
Milawati Mithai Se Kaise Bache: शुद्ध मिठाई चुनने के 7 आसान तरीके

आचार्य मनीष जी की सलाह: त्योहार की खुशी सेहत के साथ तभी पूरी होती है, जब थाली में शुद्ध चीज़ें हों। इसलिए मिठाई खरीदते समय जल्दबाज़ी न करें, थोड़ा रुककर जांच-परख ज़रूर करें।
Diwali Sweets Safety की शुरुआत दुकान के काउंटर से ही होती है। Diwali 2026 पर मिठाई खरीदने निकलें, तो इन 7 बातों का ध्यान रखें।
1. भरोसेमंद दुकान चुनें
सबसे पहले ऐसी दुकान चुनें, जिसका नाम और साख अच्छी हो। साथ ही, देखें कि दुकान पर FSSAI का लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर लगा है या नहीं। यह नंबर बताता है कि दुकान खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत रजिस्टर्ड है।
2. पैकेज्ड मिठाई का लेबल ध्यान से पढ़ें
डिब्बाबंद मिठाई लेते समय लेबल पर ये बातें ज़रूर देखें:
- FSSAI लाइसेंस नंबर
- सामग्री की सूची (ingredients)
- बनने की तारीख और एक्सपायरी डेट
- स्टोरेज के निर्देश, जैसे “फ्रिज में रखें”
- शाकाहारी होने का हरा निशान
अगर लेबल पर ज़रूरी जानकारी नहीं है, तो वह डिब्बा न लें।
3. खुली मिठाई पर “Best Before” तारीख देखें
बहुत लोग यह बात नहीं जानते। FSSAI के नियम के अनुसार, 1 अक्टूबर 2020 से खुली मिठाई की ट्रे पर “Best Before” तारीख दिखाना ज़रूरी है। यानी दुकानदार को बताना होगा कि मिठाई कब तक खाने लायक है। अगर ट्रे पर यह तारीख नहीं है, तो दुकानदार से पूछें।
4. सफाई पर ध्यान दें
दुकान का माहौल भी बहुत कुछ बताता है। देखें कि मिठाइयां ढककर रखी गई हैं या नहीं। इसके अलावा, मिठाई देने वाले कर्मचारी दस्ताने पहनें और आसपास मक्खियां न हों। गंदी जगह पर रखी मिठाई कितनी भी सुंदर दिखे, उससे बचें।
5. बहुत चटक रंग वाली मिठाई से बचें
असली मिठाई का रंग आम तौर पर हल्का और प्राकृतिक होता है। बहुत चमकीले लाल, हरे या पीले रंग की मिठाई में ज़्यादा रंग होने की संभावना रहती है। इसलिए हल्के रंग वाली या बिना रंग की मिठाई चुनें।
6. बहुत सस्ते दाम पर सावधान रहें
शुद्ध खोया और देसी घी सस्ते नहीं आते। अगर कोई दुकान बाज़ार से बहुत कम दाम पर मिठाई बेच रही है, तो सतर्क हो जाएं। कम दाम के पीछे कई बार घटिया सामग्री छिपी होती है।
7. ज़रूरत जितनी, ताज़ा खरीदें
दिवाली से कई दिन पहले ढेर सारी मिठाई खरीदकर न रखें। ज़रूरत के हिसाब से थोड़ी-थोड़ी और ताज़ी मिठाई लें। दूध से बनी मिठाइयों को घर लाते ही फ्रिज में रखें और जल्दी खत्म करें।
ये सावधानियां आपको काफी हद तक सुरक्षित रखती हैं। फिर भी, कई बार मन में शक रह जाता है कि मिठाई सही है या नहीं।
मिठाई में मिलावट कैसे पहचानें? घरेलू जांच और उनकी सीमाएं
FSSAI ने आम लोगों के लिए DART (Detect Adulteration with Rapid Test) गाइड जारी की है। इसमें घर पर की जाने वाली कुछ आसान जांचें बताई गई हैं।
चांदी का वर्क:
- मसलकर देखें: असली चांदी का वर्क उंगलियों में मसलने पर बारीक पाउडर बन जाता है। दूसरी ओर एल्युमिनियम सिर्फ छोटे टुकड़ों में टूटता है।
- जलाकर देखें: वर्क की छोटी गोली बनाकर जलाएं। असली चांदी जलकर चमकदार छोटे दाने छोड़ती है जबकि एल्युमिनियम स्लेटी राख बन जाता है।
स्टार्च की जांच: DART गाइड में दूध और घी में स्टार्च पहचानने के लिए आयोडीन टेस्ट बताया गया है। इसमें आयोडीन की कुछ बूंदें डालने पर नीला रंग आए, तो स्टार्च मिलाया गया हो सकता है।
गंध, स्वाद और बनावट: खट्टी गंध, चिपचिपी सतह या अजीब स्वाद बताते हैं कि मिठाई बासी हो सकती है।
कुछ आम भ्रम और सच:
- भ्रम: महंगी मिठाई हमेशा शुद्ध होती है। सच: ज़रूरी नहीं। दाम के साथ दुकान की साख और सफाई भी देखें।
- भ्रम: चमकदार मिठाई ज़्यादा ताज़ी होती है। सच: ज़्यादा चमक कई बार रंग या तेल की वजह से होती है।
- भ्रम: पैकेज्ड मिठाई पूरी तरह सुरक्षित होती है। सच: पैकेट पर भी लेबल और तारीख जांचना ज़रूरी है।
खरीदारी की सावधानी के बाद अब बात करते हैं कि मिठाई पर शक बना रहे तो उसे नज़रअंदाज़ न करें।
मिठाई की शुद्धता या त्योहार में खानपान को लेकर कोई सवाल है? हमारी टीम से बात करें। संपर्क करें
मिलावट का संदेह हो तो क्या करें?
अगर किसी मिठाई में मिलावट का शक हो, तो चुप न रहें। आपकी एक शिकायत कई और परिवारों को बचा सकती है। ये आसान कदम उठाएं:
- बिल और सैंपल संभालकर रखें: मिठाई का बिल और थोड़ा-सा हिस्सा संभालकर रखें। शिकायत में यही सबूत काम आएगा।
- FSSAI पर शिकायत करें: FSSAI के Food Safety Connect ऐप या ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
- खाद्य सुरक्षा अधिकारी से संपर्क करें: अपने ज़िले के फूड सेफ्टी ऑफिसर को भी जानकारी दे सकते हैं।
- उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कॉल करें: राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर भी शिकायत की जा सकती है।
याद रखें, जागरूक ग्राहक ही मिलावट के खिलाफ सबसे बड़ी ताकत है। शुद्ध मिठाई चुनने के साथ-साथ यह भी ज़रूरी है कि त्योहार के दिनों में हम उसे किस तरह खाते हैं।
दिवाली पर सेहत का ध्यान कैसे रखें? आचार्य मनीष जी के दिवाली हेल्थ टिप्स

आयुर्वेद के अनुसार, अच्छी सेहत की जड़ हमारी पाचन अग्नि है। Acharya Manish Ji भी हमेशा इसी बात पर ज़ोर देते हैं। धनतेरस से भाई दूज तक, इन पाँच दिनों में पाचन पर सबसे ज़्यादा बोझ पड़ता है। ज़्यादा मिठाई और तली हुई चीज़ें अग्नि को कमज़ोर करती हैं। इससे मंदाग्नि होती है और शरीर में आम, यानी अधपचा कचरा, जमा होने लगता है। ये आसान सुझाव आयुर्वेद के इन्हीं सिद्धांतों पर आधारित हैं।
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बाज़ार की जगह घर की मिठाई
इस बार कुछ मिठाइयां घर पर बनाएं। गुड़, खजूर, ड्राई फ्रूट्स, नारियल और तिल के लड्डू जल्दी बन जाते हैं। इनमें शुद्धता की चिंता नहीं रहती और ये शरीर को पोषण भी देते हैं।
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गिफ्ट में समझदारी
रिश्तेदारों को रंग-बिरंगे डिब्बों की जगह ड्राई फ्रूट्स, घर की बनी मिठाई या गुड़ के लड्डू दें। यह तोहफा सेहतमंद भी है और इसमें अपनापन भी झलकता है।
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मिठाई और तली चीज़ें एक साथ नहीं
त्योहार में अक्सर मिठाई और नमकीन साथ-साथ परोसे जाते हैं। दोनों को एक साथ खाने से पाचन पर दोगुना बोझ पड़ता है। इसलिए इन्हें दिन में अलग-अलग समय पर खाएं।
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मिठाई खाने का सही समय
आयुर्वेद के अनुसार, दिन में पाचन अग्नि सबसे तेज़ होती है। इसलिए मिठाई दोपहर के आसपास खाना बेहतर है। लक्ष्मी पूजा के बाद देर रात भारी मिठाई खाने से बचें, क्योंकि उस समय पाचन धीमा होता है।
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पूजा या व्रत के बाद खाली पेट मिठाई नहीं
कई लोग पूजा या व्रत के बाद सीधे मिठाई से शुरुआत करते हैं। इससे पेट पर अचानक बोझ पड़ता है। पहले थोड़ा पानी या कोई हल्का फल लें, फिर मिठाई खाएं।
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मेहमानों के बीच मात्रा पर नज़र
हर घर में मिठाई खिलाई जाती है और मना करना मुश्किल लगता है। ऐसे में हर जगह बस एक छोटा टुकड़ा लें। धीरे-धीरे, स्वाद लेकर खाएं।
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भारी खाने के बाद सौंफ-अजवाइन और गुनगुना पानी
त्योहार के भारी खाने के बाद एक चुटकी सौंफ या अजवाइन चबाएं। साथ में एक गिलास गुनगुना पानी पिएं। इससे पेट फूलना और भारीपन कम होता है।
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पटाखों के धुएं से सांस का बचाव
दिवाली की रात हवा में धुआं बढ़ जाता है। जिन लोगों को अस्थमा या एलर्जी है, वे ज़्यादा धुएं में बाहर न रहें। रात को भाप लें और साफ हवा में अनुलोम-विलोम करें।
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देर रात जागने के बाद आराम
लक्ष्मी पूजा की रात अक्सर देर तक जागना होता है। इसलिए अगले दिन सुबह हल्का नाश्ता करें और शरीर को पूरा आराम दें।
खास ध्यान दें: डायबिटीज़ या हाई BP वाले लोग मिठाई की मात्रा पर खास नियंत्रण रखें। अपनी डाइट या दवाओं में कोई बदलाव करने से पहले डॉक्टर से बात ज़रूर करें।
त्योहार के इन दिनों के बाद शरीर को फिर से संतुलन में लाना भी उतना ही अहम है।
दिवाली के बाद भी सेहत कैसे बनाए रखें?
असली परीक्षा त्योहार के बाद शुरू होती है जब पाचन और दिनचर्या को फिर से पटरी पर लाना होता है। इन आदतों से यह काम आसान हो जाता है —
- मीठे की जगह प्राकृतिक मिठास: मीठा खाने का मन करे, तो फल, खजूर या थोड़ा गुड़ लें।
- मौसमी खानपान: सर्दी शुरू हो रही है, इसलिए आंवला, तिल, गुड़ और हरी सब्ज़ियों को डाइट में शामिल करें।
- रात का खाना जल्दी: त्योहार की देर रातों के बाद फिर से जल्दी और हल्का डिनर करने की आदत डालें।
- खाने के बाद टहलना: हर भोजन के बाद 10–15 मिनट टहलें। इससे पाचन बेहतर होता है।
- समय पर सोना और जागना: नींद का एक तय समय बनाएं, ताकि शरीर की ऊर्जा लौट आए।
- रोज़ योग और प्राणायाम: रोज़ 15–20 मिनट योग और अनुलोम-विलोम करें। इससे शरीर और मन दोनों संतुलित रहते हैं।
- तिल के तेल से मालिश (अभ्यंग): सर्दियों में नहाने से पहले गुनगुने तिल के तेल से मालिश करें। यह आयुर्वेदिक दिनचर्या का अहम हिस्सा है।
लंबे समय की सेहत के लिए पंचकर्म
आचार्य मनीष जी का तरीका चार स्तंभों पर टिका है: आहार (सही भोजन), विहार (सही दिनचर्या), शमन (जड़ी-बूटियां) और शोधन (पंचकर्म)।
पंचकर्म आयुर्वेद की पारंपरिक शुद्धि प्रक्रिया है। यह शरीर में जमा आम को बाहर निकालने में मदद करती है। त्योहारों के भारी खानपान के बाद यह पाचन और दोषों को फिर से संतुलन में लाने में सहायक है। इस तरह यह लंबे समय तक अच्छी सेहत बनाए रखने में भी साथ देती है।
ध्यान रहे, पंचकर्म हमेशा आयुर्वेदिक डॉक्टर की जांच के बाद और उनकी निगरानी में ही कराएं।
त्योहारों के बाद शरीर को संतुलन में लाना चाहते हैं? आचार्य मनीष जी की टीम से पंचकर्म और सही दिनचर्या के बारे में जानें।
निष्कर्ष
त्योहारों में मांग बढ़ने से मिठाइयों में मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है। FSSAI के सर्वे बताते हैं कि खोया, पनीर और दूध की गुणवत्ता पर नज़र रखना कितना ज़रूरी है। मिलावटी मिठाई पेट खराब करने से लेकर लंबे समय तक सेहत पर असर डाल सकती है। भरोसेमंद दुकान, लेबल, “Best Before” तारीख और सफाई जैसी सावधानियां इस खतरे को काफी कम करती हैं। आचार्य मनीष जी के आयुर्वेदिक सुझाव, सही शिकायत का तरीका और दिवाली के बाद की आदतें, सब मिलकर Diwali 2026 को स्वादिष्ट और सेहतमंद बनाते हैं।
हर परिवार की सेहत और खानपान अलग होते हैं, इसलिए त्योहार की तैयारी भी समझदारी से होनी चाहिए। आचार्य मनीष जी की टीम से संपर्क करें और दिवाली के लिए सही डाइट और दिनचर्या की सलाह पाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. नकली मिठाई की पहचान कैसे करें?
बहुत चटक रंग, खट्टी गंध, चिपचिपी सतह और बहुत कम दाम, ये नकली या घटिया मिठाई के संकेत हो सकते हैं। पक्की पुष्टि लैब टेस्ट से ही होती है।
2. मिलावटी खोया कैसे पहचानें?
थोड़े खोये को पानी में उबालकर ठंडा करें और आयोडीन की कुछ बूंदें डालें। नीला रंग आए, तो उसमें स्टार्च मिला हो सकता है।
3. असली और नकली चांदी के वर्क में फर्क कैसे पहचानें?
असली चांदी मसलने पर पाउडर बन जाती है और जलाने पर चमकदार दाने छोड़ती है। वहीं, एल्युमिनियम टुकड़ों में टूटता है और जलाने पर स्लेटी राख बनता है।
4. मिठाई खरीदने से पहले क्या देखें?
दुकान पर FSSAI नंबर, पैकेट पर लेबल और एक्सपायरी, खुली मिठाई पर “Best Before” तारीख और दुकान की सफाई ज़रूर देखें।
5. खुली मिठाई सुरक्षित है या पैकेज्ड?
दोनों सुरक्षित हो सकती हैं, बशर्ते सही दुकान से ली जाएं। पैकेज्ड पर लेबल और खुली मिठाई पर “Best Before” तारीख ज़रूर जांचें।
6. डायबिटीज़ में दिवाली पर मिठाई खाएं या नहीं?
डायबिटीज़ में मिठाई की मात्रा बहुत सीमित रखें और शुगर पर नज़र रखें। कोई भी बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।
7. मिलावटी मिठाई की शिकायत कहां करें?
आप FSSAI के Food Safety Connect ऐप, ऑनलाइन पोर्टल या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर शिकायत कर सकते हैं।


