कौन सा दूध पीना चाहिए? | Dudh Pina Chahie Ya Nahin | आचार्य मनीष जी के विचार
दूध हमारे आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। लेकिन Dudh Pina Chahie Ya Nahin यह सवाल बना रहता है। क्या वास्तव में दूध सेहत के लिए आवश्यक है? कौन सा दूध उपयुक्त है – गाय का या भैंस का? Acharya Manish Ji के अनुसार, सही दूध का चुनाव स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। इस लेख में समझेंगे कि Which milk is good for health और किस प्रकार का दूध शरीर के लिए सही विकल्प हो सकता है।
क्या दूध पीना जरूरी है?
दूध को स्वास्थ्य के लिए जरूरी माना जाता रहा है, लेकिन आधुनिक शोध और आयुर्वेद इसकी अलग व्याख्या करते हैं। "The China Study" में पाया गया कि डेयरी उत्पादों, विशेष रूप से गाय और भैंस के दूध में मौजूद कैसिइन (Casein) प्रोटीन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
आचार्य मनीष जी के अनुसार, दूध की गुणवत्ता और उसके प्रभाव को समझना आवश्यक है। बाजार में मिलने वाला प्रोसेस्ड दूध कई प्रक्रियाओं से गुजरता है, जिससे उसके प्राकृतिक पोषक तत्व खत्म हो सकते हैं। वहीं, पशु आधारित आहार का अधिक सेवन कई बीमारियों से जुड़ा पाया गया है।
गाय का दूध बनाम भैंस का दूध | Cow Milk vs Buffalo Milk
विशेषता | गाय का दूध | भैंस का दूध |
रंग | हल्का पीला | सफेद |
वसा की मात्रा | कम | अधिक |
पाचन प्रक्रिया | आसान | भारी |
ऊर्जा स्तर | सीमित ऊर्जा, कुछ लोगों के लिए पर्याप्त नहीं | भारी, कठिन पाचन, सुस्ती महसूस हो सकती है |
क्या दूध हर किसी के लिए सही है?
आयुर्वेद में शरीर के तीन दोष – वात, पित्त और कफ के अनुसार भोजन का चयन करने की सलाह दी जाती है।
वात दोष वाले लोग हल्के और गरम दूध का सेवन कर सकते हैं, लेकिन सीमित मात्रा में।
पित्त दोष वाले लोगों को दूध के अधिक सेवन से बचना चाहिए, विशेष रूप से यदि वे एसिडिटी या जलन की समस्या से परेशान हैं।
कफ दोष वाले लोग भारी, गाढ़े दूध का सेवन न करें, क्योंकि यह बलगम बढ़ा सकता है।
Acharya Manish Ji के अनुसार, यदि आप दूध का सेवन कर रहे हैं तो यह आवश्यक है कि आप अपने शरीर के अनुकूल दूध का चुनाव करें।
क्या दूध बीमारियों से जुड़ा हो सकता है?
"The China Study" के अनुसार, डेयरी उत्पादों का अधिक सेवन हृदय रोग, डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों से जुड़ा हो सकता है। इस अध्ययन में पाया गया कि जिन क्षेत्रों में डेयरी और मांसाहारी भोजन का अधिक सेवन होता है, वहां क्रॉनिक बीमारियों की संभावना अधिक होती है।
कैसिइन (Casein) को कैंसर की वृद्धि से जोड़ा गया है। इसके अलावा, बाजार में मिलने वाले प्रोसेस्ड दूध में मौजूद हार्मोन और एडिटिव्स शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
क्या जानवर के दूध का कोई विकल्प है?
अगर आप दूध का सेवन नहीं करना चाहते हैं, तो कई पौधों पर आधारित विकल्प मौजूद हैं:
बादाम का दूध – हल्का, प्रोटीन युक्त और आसानी से पचने वाला।
नारियल का दूध – प्राकृतिक रूप से मीठा और पोषण से भरपूर।
मूंगफली का दूध – प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरपूर, किफायती और पौष्टिक विकल्प।
आचार्य मनीष जी के अनुसार, प्लांट-बेस्ड दूध (Plant-based milk) एक बेहतर विकल्प हो सकता है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो लैक्टोज असहिष्णुता (Lactose Intolerance) या डेयरी उत्पादों से एलर्जी से पीड़ित हैं।
घर पर नारियल, मूंगफली और बादाम का दूध व दही बनाने की विधि
अब जब हमने समझा कि दूध के विभिन्न प्रकार और उनके प्रभाव क्या हैं, आइए जानते हैं कि घर पर ही पौधों पर आधारित दूध और दही कैसे बनाया जा सकता है।
नारियल का दूध बनाने की विधि
नारियल के टुकड़ों को छोटे-छोटे काटकर ग्राइंडर में डालें।
इसमें आधा से एक गिलास पानी डालकर अच्छी तरह पीस लें।
इस मिश्रण को मलमल या कॉटन के कपड़े से छानकर दूध निकाल लें।
बचे हुए नारियल पल्प को दोबारा ग्राइंड करें, पानी मिलाएं और यही प्रक्रिया दो बार दोहराएं।
इस विधि से शुद्ध नारियल दूध प्राप्त होगा।
मूंगफली का दूध बनाने की विधि
मूंगफली को रातभर पानी में भिगोकर रखें।
सुबह इनके छिलके निकालकर ग्राइंडर में डालें और थोड़ा पानी मिलाकर पीस लें।
तैयार मिश्रण को मलमल के कपड़े से छान लें।
बचे हुए पल्प को दोबारा पीसकर पानी मिलाएं और फिर छान लें।
इस प्रक्रिया को दो बार दोहराने से पौष्टिक मूंगफली दूध तैयार हो जाएगा।
बादाम का दूध बनाने की विधि
बादाम को रातभर पानी में भिगोकर रखें।
सुबह इनका छिलका उतारकर ग्राइंडर में डालें और थोड़ा पानी मिलाकर पीस लें।
इस मिश्रण को मलमल के कपड़े से छानकर दूध निकालें।
बचा हुआ पल्प फिर से ग्राइंड करें, पानी मिलाएं और यही प्रक्रिया दो बार दोहराएं।
इस विधि से शुद्ध बादाम का दूध प्राप्त होगा।
डबल बॉयलर मेथड से दही बनाने की विधि
एक बड़े बर्तन में पानी डालें और गैस पर गर्म करें।
इसके ऊपर एक दूसरा बर्तन रखें और उसमें दूध डालें।
दूध को हल्का गरम करें, लेकिन उबालें नहीं।
अब इसमें दो हरी मिर्च काटकर डाल दें।
दूध को ढककर रातभर के लिए रख दें।
सुबह तक यह जमकर दही बन जाएगा।
निष्कर्ष: कौन सा दूध पीना चाहिए?
Dudh Pina Chahie Ya Nahin यह व्यक्ति की जरूरतों और आहार शैली पर निर्भर करता है। डेयरी उत्पाद पाचन में समस्या पैदा कर सकते हैं या एलर्जी का कारण बन सकते हैं। ऐसे में नारियल, मूंगफली और बादाम का दूध बेहतर विकल्प हो सकते हैं। ये प्राकृतिक, सुपाच्य और पोषण से भरपूर होते हैं। आचार्य मनीष जी के अनुसार, दूध का चयन करते समय शुद्धता और शरीर की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
लैक्टोज असहिष्णुता होने पर दूध का सेवन संभव है?
ऐसे लोग बादाम, नारियल या मूंगफली के दूध का विकल्प चुन सकते हैं।कौनसा दूध पीना चाहिए?
यह व्यक्ति की पाचन क्षमता और जरूरतों पर निर्भर करता है। नारियल, मूंगफली या बादाम का दूध हल्का और सुपाच्य विकल्प हो सकते हैं।प्रोसेस्ड दूध से क्या सावधानियां रखनी चाहिए?
इसमें मिलावट और एडिटिव्स हो सकते हैं, इसलिए शुद्ध या प्लांट-बेस्ड दूध बेहतर विकल्प है।क्या मूंगफली का दूध स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है?
मूंगफली का दूध प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरपूर होता है, जो ऊर्जा और पोषण प्रदान कर सकता है।
प्लांट-बेस्ड दूध क्यों अपनाया जा सकता है?
यह आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है और डेयरी उत्पादों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।
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